By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
NoorPostNoorPost
  • होम
  • न्यूज़
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • मुस्लिम दुनिया
  • इतिहास
    • मुस्लिम वैज्ञानिक
    • सामाजिक कार्यकर्ता
    • स्वतंत्रता सेनानी
    • उस्मानी साम्राज्य
    • जीवनी
  • वीडियो
  • ब्लॉग
  • मजहब
  • अन्य
    • खान-पान
    • स्वास्थ्य
    • शिक्षा
    • रोजगार
    • साइंस-टेक्नोलॉजी
      • मोबाइल
Sign In
नोटिफिकेशन और दिखाएं
Font Resizerआ
Font Resizerआ
NoorPostNoorPost
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • मुस्लिम दुनिया
  • इतिहास
  • खान-पान
  • ब्लॉग
  • मजहब
  • रोजगार
  • वीडियो
  • शिक्षा
  • साइंस-टेक्नोलॉजी
  • सोशल मीडिया
  • स्वास्थ्य
Search
  • प्रमुख पेज
    • होम
    • संपर्क करें
    • गोपनीयता नीति
    • अस्वीकरण
    • सर्च करें
  • मेरी चीजें
    • सुरक्षित पोस्ट
    • मेरे लिए
    • पढ़े गए पोस्ट
    • पसंदीदा टॉपिक्स
    • पसंदीदा लेखक/लेखिका
  • Categories
    • मुस्लिम दुनिया
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • इतिहास
    • खान-पान
    • ब्लॉग
    • मजहब
    • शिक्षा
    • स्वास्थ्य
    • रोजगार
    • वीडियो
    • साइंस-टेक्नोलॉजी
    • सोशल मीडिया
Sign In Sign In
Follow US
> मजहब > क़ुरान > आज तरावीह में क्या पढ़ा। पारा नंबर – 3

आज तरावीह में क्या पढ़ा। पारा नंबर – 3

यह पारा-3 मुख्य रूप से सूरह आले-इमरान की सरल और आसान शिक्षाओं का संग्रह है। इसमें पिछली कौमों की गलतियों से सबक, सदका और खर्च करने के सही तरीके, कर्ज लिखने के नियम, अमानत और वादे की पाबंदी, अल्लाह पर पूरा भरोसा, दुनिया की चकाचौंध से बचना, जन्नत की चाहत, नबी की पैरवी और अल्लाह की राह में पूरी ताकत लगाने की हिदायत दी गई है। यह पारा आम मुसलमानों को रोजमर्रा की जिंदगी में ईमान को मजबूत रखने और अच्छे काम करने की प्रेरणा देता है।
एо अहमद
एо अहमद
एо अहमद
लेखकएо अहमद
Founder and Editor
मैं आफताब अहमद इस साइट पर एक लेखक हूं, मुझे विभिन्न शैलियों और विषयों पर लिखना पसंद है। मुझे ऐसा निबंध और ब्लॉग लिखना अच्छा लगता...
Follow:
Published: 21/02/2026
2 लोगों ने देखा
No Comments
शेयर
10 मिनट में पढ़ें
Taraweeh Summary in Hindi

तरावीह पारा-3

हाईलाइट्स
  • सूरह अल-बक़रा का तीसरा और आखिरी हिस्सा और सूरह आले-इमरान का शुरुआती भाग शामिल है।
  • 👉 इसे शेयर क्यों करें?

सूरह अल-बक़रा का तीसरा और आखिरी हिस्सा और सूरह आले-इमरान का शुरुआती भाग शामिल है।

पिछली क़ौमों (समुदायों) ने अल्लाह की रौशन (चमकदार) किताब की नाक़दरी (अनादर) की और आपस में खून-खराबा (लड़ाई-झगड़ा) किया, तुम उनके तरीके से बचो। अल्लाह ने जो माल दिया है उसे भलाई के कामों में खर्च करो, इस से पहले कि वह दिन आ जाए जब न कोई ख़रीद व फरोख्त (खरीद-बिक्री) होगी न कोई सिफ़ारिश (मध्यस्थता) चलेगी और न कोई दोस्ती काम आएगी।

यह बात कभी मत भूलो कि तुम हर लम्हा (पल) ज़िंदा व जावेद (अमर) हस्ती (अस्तित्व) ख़ुदा की मुकम्मल (पूर्ण) निगरानी (देखरेख) में हो।

अल्लाह की मज़बूत रस्सी को मज़बूती से थामे रहो। ताग़ूत (शैतानी ताकत) के आगे कभी न झुको। अल्लाह पर ईमान लाओ और अल्लाह को अपना दोस्त बनाओ। अँधेरों से दूर भागो और उजाले से मुहब्बत (प्यार) करो।

अल्लाह की क़ुदरत (ताकत) पर यक़ीन (भरोसा) रखो। वही मारता है और वही जिलाता (जिंदा करता) है।

इसलिए न कभी शक-शुबह (संदेह) में पड़ो और न कभी मायूसी (निराशा) को क़रीब आने दो।

अल्लाह की राह में ख़र्च करो। ख़र्च करके एहसान (उपकार) न जताओ और न किसी के दिल को दुखाओ। तुम्हारे पास देने के लिए न हो तो दिल रखने वाला एक जुमला (वाक्य) कह दो या माज़रत (माफी) कर लो। एहसान जताकर और दिल दुखा कर अपने सदक़े (दान) को बर्बाद मत करो। ख़र्च करो अल्लाह की ख़ुशी हासिल करने के लिए और अपने साथियों को साबित-क़दम (मजबूत) रखने के लिए।

उम्दा (श्रेष्ठ) और पाकीज़ा (पवित्र) माल ख़र्च करो। सदक़े में ऐसी ख़राब चीज़ मत दो जिसे लेना तुम खुद पसंद न करो।

शैतान तुम्हें मुफ़लिसी (गरीबी) से डराता है और बेहयाई (बेशर्मी) की राह सुझाता है। उसके धोखे में न आओ। अल्लाह से लौ लगाओ (प्यार बढ़ाओ)। अल्लाह मग़फ़िरत (माफी) और मेहरबानी (कृपा) का वादा करता है और सदका करने वालों को हिकमत (बुद्धि) की दौलत से नवाजता (इनाम देता) है।

खर्च करते वक्त उन ग़रीबों को तलाश करो जो कहीं घिरे हुए हैं और मजबूर हैं। वे ज़रूरतमंद हैं मगर उनकी ख़ुद्दारी (आत्मसम्मान) उन्हें हाथ फैलाने नहीं देती। अल्लाह को ऐसे ख़ुद्दार लोग पसंद हैं।

अपने अंदर इनफ़ाक़ (दान करना) का जज्बा (भावना) बढ़ाओ। दिन-रात खर्च करो, खुले-छुपे खर्च करो।

सूद (ब्याज) हराम (निषिद्ध) है। अपने माल को सूद से पाक (शुद्ध) रखो, अल्लाह की नाराजगी से बचो और जो सूद तुम्हारा बाकी रह जाए उसे छोड़ दो।

ज़ुल्म (ज्यादती) से बचो और याद रखो कर्ज़ देकर ज्यादा लेना जुल्म है और कर्ज लेकर कम लौटाना भी ज़ुल्म है।

अगर कर्ज़ लेने वाला तंगदस्त (तंगहाल) हो तो खुशहाली तक उसे मोहलत (समय) दो और उसे माफ़ कर दो तो यह ज़्यादा बेहतर है।

क़र्ज का लेन-देन हो तो उसे लिखने का एहतिमाम (प्रबंध) करो, उसके लिए गवाही का इंतिज़ाम (व्यवस्था) करो। जो ख़ुद न लिखवा सके तो उसका वली (अभिभावक) लिखवाए और सरपरस्त (संरक्षक) अल्लाह से डरे और लिखने में कोई कमी-बेशी न करे।

कर्ज़ कम हो या ज्यादा, लिखने में सुस्ती न करो। लिखने वाले और गवाही देने वाले भी अल्लाह से डरें और ऐसा कुछ न करें जिससे किसी फ़रीक (पक्ष) को नुकसान पहुंचे।

अमल (काम) की पाकीज़गी (पवित्रता) की फ़िक्र (चिंता) करो और दिल की सफाई (शुद्धता) का खयाल रखो। याद रखो कि जो तुम्हारे दिल में है और जो तुम्हारे अमल से जाहिर (प्रकट) है, अल्लाह सब से वाक़िफ़ (परिचित) है और सब का हिसाब लेगा।

दीन (धर्म) के प्रचार-प्रसार में अपनी सारी ताकत लगा दो, साथ ही अल्लाह से मदद की दुआ भी करते रहो।

3. सूरह आले-इमरान

अल्लाह के तमाम अहकाम (हुक्म) पर ईमान लाओ और दिल की टेड़ (टेढ़ापन) से अल्लाह की पनाह (शरण) माँगो।

औरतें, बच्चे, सोना-चांदी, घोड़े, मवेशी और खेत – यह सब कुछ दुनिया की चंद दिनों की ज़िंदगी का सामान हैं। उनकी मुहब्बत (प्यार) में गिरफ़्तार (फंसे) न हो और जन्नत के तलबगार (चाहने वाले) बनो।

तुम ऐसे बन जाओ कि सब्र (धैर्य) तुम्हारा शेवा (तरीका) हो, सच्चाई तुम्हारी आदत हो, फ़रमाँबरदारी (आज्ञा मानना) तुम्हारी पहचान हो, अल्लाह की राह में खर्च करना तुम्हारी सिफ़त (खूबी) हो और रात के आखिरी पहर में अल्लाह से इस्तिराफ़ार (तौबा) करना तुम्हारी आदत हो।

याद रखो अल्लाह के आदेशों को झुठलाना और नबियों को कत्ल (मार डालना) करना बहुत बड़ा जुर्म (गुनाह) है, और उन लोगों को क़त्ल करना भी बहुत बड़ा जुर्म है जो लोगों को इंसाफ़ (न्याय) और रास्तबाज़ी (ईमानदारी) की नसीहत (सलाह) करते हैं।

इज्जत व सरबुलंदी (ऊंचाई) का मालिक अल्लाह है। वह जिसे चाहता है इक्तेदार (सत्ता) देता है और जिससे चाहता है छीन लेता है। जिसे चाहता है इज़्ज़त देता है और जिसे चाहता है रुस्वा (अपमानित) कर देता है। सारा ख़ैर (भलाई) उसी के हाथ में है। वह जिसे चाहता है बेहिसाब (बेशुमार) नवाज़ता (इनाम देता) है।

तुम अल्लाह पर ईमान रखते हो तो अल्लाह का इनकार करने वालों को दोस्त न बनाओ और उनसे हर तरह से चौकन्ना (सतर्क) रहो।

तुम अल्लाह से मुहब्बत करते हो तो नबी की पैरवी (अनुसरण) करो, अल्लाह तुमको दोस्त रखेगा। ज़िन्दगी के हर मामले में अल्लाह और उसके रसूल की इताअत (आज्ञापालन) करो।

अपनी औलाद (संतान) के सिलसिले (मामले) में मरियम की माँ से नसीहत लो। किस तरह उनके पैदा होने से पहले ही उन्हें अल्लाह के लिए वक़्फ़ (समर्पित) कर दिया और पैदा हो जाने के बाद यह तमन्ना की कि यह बच्ची शैतान से महफ़ूज़ (सुरक्षित) रहे और इस बच्ची की औलाद भी महफ़ूज़ रहे।

ज़करिया के वाक़ये (घटना) से सबक़ (सीख) लो। दिल में नेक ख़्वाहिश (अच्छी चाहत) पैदा हो तो अल्लाह के सामने दुआ के लिए हाथ फैलाओ। यह मत देखो कि असबाब (साधन) म्वाफ़िक़ (अनुकूल) हैं या मुख़ालिफ़ (विरोधी)। अल्लाह जो चाहे वह कर सकता है। अल्लाह की नेमतों (उपहारों) पर अल्लाह को ख़ूब ख़ूब याद करो।

जब अल्लाह के दीन को मदद की ज़रूरत हो तो देर मत करो और बढ़ कर कहो कि हम हैं अल्लाह के मददगार। अल्लाह की किताब पर ईमान लाने और रसूल की पैरवी करने में ज़रा भी देर न लगाओ और अपने आप को हक़ की गवाही देने वालों की सफ़ (कतार) में खड़ा करो।

अमानत (विश्वास) में खयानत (धोखा) न करो, अपने अहद (वचन) को पूरा करो, अल्लाह की नाराज़गी से बचो, अल्लाह से किए हुए अहद और क़समों का सौदा मत करो। यह अल्लाह के नज़दीक निहायत (अत्यंत) संगीन (गंभीर) जुर्म है। अल्लाह को छोड़ कर किसी को रब न बनाओ, फ़रिश्तों को भी नहीं और नबियों को भी नहीं।

रसूल पर सच्चे दिल से ईमान लाओ और रसूल की मदद के लिए आगे बढ़ो।

इबादत सिर्फ़ अल्लाह की करो। उसके साथ किसी को शरीक (साझी) न ठहराओ, और अल्लाह के सिवा किसी को रब न बनाओ। इन चीज़ों में कभी समझौता न करो और दूसरों को भी इन्हीं उसूलों की दावत दो।

इब्राहीम अल्लाह की तरफ़ पूरी तरह यकसू (एकाग्र/समर्पित) थे और अल्लाह के बहुत ज़्यादा फ़रमाँबरदार (आज्ञाकारी) थे। उन्हीं का रास्ता इख़्तियार (अपनाओ) करो, दूसरे तमाम रास्ते गुमराही (भटकाव) की तरफ़ ले जाने वाले हैं, उनसे होशियार रहो।

अमानत में ख़यानत न करो, अपने अहद को पूरा करो, अल्लाह की नाराज़गी से बचो, अल्लाह से किए हुए अहद और कसमों का सौदा मत करो। यह अल्लाह के नज़दीक निहायत संगीन जुर्म है।

अल्लाह को छोड़ कर किसी को रब न बनाओ, फ़रिश्तों को भी नहीं और नबियों को भी नहीं।

रसूल पर सच्चे दिल से ईमान लाओ और रसूल की मदद के लिए आगे बढ़ो।


👉 यह लेख बार-बार पढ़ें ताकि इसमें छिपी गहराइयाँ आपके दिल और अमल में उतर सकें। हर बार पढ़ने पर आपको दीन की एक नई समझ हासिल होगी।

👉 इसे शेयर क्यों करें?

अल्लाह के कलाम (संदेश) को दूसरों तक पहुँचाना सदक़ा-ए-जारिया (निरंतर मिलने वाला पुण्य) है। हो सकता है कि आपके एक शेयर से किसी भटके हुए को हिदायत मिल जाए या किसी का ईमान ताज़ा हो जाए।

भलाई की राह दिखाने वाले को भी उतना ही सवाब (पुण्य) मिलता है, जितना उस पर अमल करने वाले को।

✅ आज ही इसे अपने परिवार और दोस्तों के साथ साझा करें और इस नेक काम में भागीदार बनें!

नूर पोस्ट का व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करें
टैग :मज़हब
शेयर करें :
Facebook Pinterest Whatsapp Whatsapp
◈  इस पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया दें :
Proud0
Happy0
Love1
Surprise0
Sad0
Angry0
एо अहमद
लेखकएо अहमद
Founder and Editor
Follow:
मैं आफताब अहमद इस साइट पर एक लेखक हूं, मुझे विभिन्न शैलियों और विषयों पर लिखना पसंद है। मुझे ऐसा निबंध और ब्लॉग लिखना अच्छा लगता है जो मेरे पाठकों को चिंतन और प्रेरणा देती हैं।
कमेंट करें! कमेंट करें!

कमेंट करें! Cancel reply

You must be logged in to post a comment.

हमें फॉलो करें >>

FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe

सबसे अधिक पढ़ी गईं >>

8 Islamic Principles for Successful Business, in the Light of the Holy Quran and Hadith

सफल व्यापार के लिए 8 इस्लामी सिद्धांत, पवित्र कुरान और हदीस की रोशनी में

9 मिनट में पढ़ें
651 लोगों ने देखा

🌟 इमाम अहमद इब्न हंबल: एक बहादुर योद्धा की कहानी जिसने इल्म और ईमान की मिसाल कायम की

20 मिनट में पढ़ें
328 लोगों ने देखा

नासिर अहमद: वह शख्स जिसने आपकी डिजिटल दुनिया बदल दी!

10 मिनट में पढ़ें
118 लोगों ने देखा

डॉ. ज़ाकिर हुसैन: भारत के पहले मुस्लिम राष्ट्रपति की प्रेरणादायक कहानी

12 मिनट में पढ़ें
307 लोगों ने देखा

हवा में उड़ान भरनेवाला दुनिया का पहला इन्सान “अब्बास इब्न फिरनास”

5 मिनट में पढ़ें
1.8K लोगों ने देखा
Taraweeh Summary in Hindi

आज तरावीह में क्या पढ़ा। पारा नंबर – 2

11 मिनट में पढ़ें
4 लोगों ने देखा

अल-इद्रीसी: मध्यकालीन विश्व का महान भूगोलवेत्ता और उनकी रोमांचक कहानियां

12 मिनट में पढ़ें
210 लोगों ने देखा

मौलाना अबुल आला मौदुदी: किताबों की ताकत से इस्लाम की सच्चाई को दुनिया तक पहुंचाने वाला शख्स

12 मिनट में पढ़ें
366 लोगों ने देखा

इमाम मुस्लिम: सहीह मुस्लिम के संकलनकर्ता

14 मिनट में पढ़ें
297 लोगों ने देखा
Taraweeh Summary in Hindi

आज तरावीह में क्या पढ़ा। पारा नंबर – 1

9 मिनट में पढ़ें
13 लोगों ने देखा
Avatar
Daily Hadith
Today at 12:00 PM

सम्बंधित टॉपिक >>

हज के बारे में पांच ख़ास बातें जो शायद आपको ना पता हों।

9 मिनट में पढ़ें
90 लोगों ने देखा
Hajj

मुहम्मद (स०) का आखिरी भाषण (खुत्बा), मानवता और समानता के उपदेश से परिपूर्ण है।

4 मिनट में पढ़ें
284 लोगों ने देखा

मुसलमान कुर्बानी क्यों करते हैं? कुर्बानी का इतिहास क्या है?

8 मिनट में पढ़ें
298 लोगों ने देखा
जुमा की फजीलत

क्या है जुमा के दिन कि फजीलत, और हर मुसलमान को जुमा के दिन क्या करना चाहिए?

6 मिनट में पढ़ें
229 लोगों ने देखा

महत्वपूर्ण लिंक्स

  • सहेजी गई पोस्ट
  • आपके लिए
  • पढ़े गए पोस्ट
  • पसंदीदा टॉपिक्स
  • मेरी प्रोफाइल
  • हमारे बारे में
  • हमारी सहायता करें
  • हमे विज्ञापन दें
  • भविष्य योजना
  • साइट के लेखक
  • संपर्क करें
  • गोपनीयता नीति
  • अस्वीकरण
  • सेवा की शर्तें
  • सुधार नीति

All content © NoorPost


Video
Quiz
Home
Tools
More

Quiz Categories

General Knowledge Test IQ Islamic Quiz Science History Fun Quiz

Tools & Utilities

Age Calc Converter QR Gen BMI Calc Search Love Calc Wishes

Explore More

About Us Donate Us Privacy Terms Contact Advertise Correction Disclaimer Future Plan Writers

Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

क्या पासवर्ड भूल गए?

Not a member? Sign Up