By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
NoorPostNoorPost
  • होम
  • न्यूज़
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • मुस्लिम दुनिया
  • इतिहास
    • मुस्लिम वैज्ञानिक
    • सामाजिक कार्यकर्ता
    • स्वतंत्रता सेनानी
    • उस्मानी साम्राज्य
    • जीवनी
  • वीडियो
  • ब्लॉग
  • मजहब
  • अन्य
    • खान-पान
    • स्वास्थ्य
    • शिक्षा
    • रोजगार
    • साइंस-टेक्नोलॉजी
      • मोबाइल
Sign In
नोटिफिकेशन और दिखाएं
Font Resizerआ
Font Resizerआ
NoorPostNoorPost
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • मुस्लिम दुनिया
  • इतिहास
  • खान-पान
  • ब्लॉग
  • मजहब
  • रोजगार
  • वीडियो
  • शिक्षा
  • साइंस-टेक्नोलॉजी
  • सोशल मीडिया
  • स्वास्थ्य
Search
  • प्रमुख पेज
    • होम
    • संपर्क करें
    • गोपनीयता नीति
    • अस्वीकरण
    • सर्च करें
  • मेरी चीजें
    • सुरक्षित पोस्ट
    • मेरे लिए
    • पढ़े गए पोस्ट
    • पसंदीदा टॉपिक्स
    • पसंदीदा लेखक/लेखिका
  • Categories
    • मुस्लिम दुनिया
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • इतिहास
    • खान-पान
    • ब्लॉग
    • मजहब
    • शिक्षा
    • स्वास्थ्य
    • रोजगार
    • वीडियो
    • साइंस-टेक्नोलॉजी
    • सोशल मीडिया
Sign In Sign In
Follow US
> मजहब > इस्लामी कैलेंडर की शुरूवात कब और कैसे हुई ? मुहर्रम का महीना इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना कैसे बना ?

इस्लामी कैलेंडर की शुरूवात कब और कैसे हुई ? मुहर्रम का महीना इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना कैसे बना ?

जुबेर खान 'अकेला'
जुबेर खान 'अकेला'
Published: 27/06/2025
2k लोगों ने देखा
No Comments
शेयर
7 मिनट में पढ़ें

इस्लामी कैलेंडर की शुरूवात कब और कैसे हुई ?

सन् 17 या 18 हिजरी में अमीर अल मूमिनीन उमर बिन ख़त्ताब रज़ियल्लाहू अन्हु के सामने एक दस्तावेज़ पेश हुआ जो एक आदमी के दूसरे पर किसी हक़ या क़र्ज़ का सबूत था और उसमे ये लिखा था के ये शाबान में वाजिब उल अदा होगा। तो उमर ने पुछा कौन-सा शाबान इस साल का शाबान या पिछला या आने वाले साल का शाबान।

हाईलाइट्स
  • इस्लामी कैलेंडर की शुरूवात कब और कैसे हुई ?
  • मुहर्रम का महीना इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना कैसे बना ?
  • कैसे मुहर्रम को इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना चुना गया ?

फ़िर उन्होंने सहाबा ए किराम को जमा किया और एक इस्लामी तारीख़ को तरतीब देने के बारे में मशवरा किया जिसके ज़रिए लोगो को कर्जों और दूसरे हुक़ूक़ की अदाएगी की सही तारीख़ मालूम हो सके। किसी ने कहा फ़ारस वालो की तारीख़ इस्तेमाल की जाए, किसी ने कहा रोम वालो की तारीख़, किसी ने कहा रसूल अल्लाह की पैदाईश के दिन से हमारी तारीख़ की शुरुवात हो, कुछ लोगो ने कहा आपको नबुव्वत मिलने की तारीख़ से, कुछ ने कहा आप की हिजरत के दिन से और कुछ लोगो ने कहा आपकी वफ़ात के दिन से।

सैय्यदना उमर ख़ुद हिजरत के दिन से तारीख़ की शुरुवात की तरफ़ माएल हुए फ़िर सब ने इस्लामी सोसायटी की बुनियाद ओ ता’मीर में हिजरत नबवी की अज़ीम अहमियत के पेशे नज़र उसी राय पर इत्तिफ़ाक़ कर लिया और इस लिए भी सब ने इस राय को तरजीह दी के हिजरते नबवी हक़ ओ बातिल, रोशनी ओ अंधेरा ख़ैर ओ शर और मुशरिकीन ए मक्का के ज़ुल्म ओ ज़ियादती और घमंड ओ ग़ुरुर और मज़लूम मुसलमानों के नए दौर की शुरुवात के दरमियान हद्द ए फ़ासिल थी जब सब हिजरत को शुरुवाती तारीख़ मानने पर राज़ी हो गए तो कहने लगे किस महीने से इस्लामी साल की शुरुवात हो फ़िर “मुहर्रम” के महिने पर सबका इत्तिफ़ाक़ हो गया इस लिए के इसी महीने लोग हज से वापस आते हैं इसी लिए मुहर्रम से इस्लामी साल की शुरुवात होती है”
(अस सादिक़ुल अमीन पेज नं 282)

मुहर्रम का महीना इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना कैसे बना ?

हज़रत उमर रज़ियल्लाहू अन्हु के ख़िलाफ़त के ज़माने में (लगभग 17 हिजरी) मुस्लिम सल्तनत बहुत बढ़ गई थी जिस की वजह से हिसाब किताब रखा जाने लगा जेसे ये इलाक़े से क्या आता है वो इलाक़े से क्या आता है. ज़कात, टैक्स वग़ैराह इन सब चीज़ों का हिसाब किताब रखा जाने लगा इस्लामी कैलेंडर न होने की वजह से हिसाब किताब रखने में बहुत परेशानी हो रही थी तो हुआ ये की हिसाब किताब के लिए लोगों ने कहा –
ऐ! अमीरुल मोमिनीन ये जो हम टैक्स, ज़कात वगैरह लेते हैं इसके लिए कोई शुरूवाती महीना (Starting Month) हो और आख़री महीना (Ending Month) हो ताकि इस्लामी साल का एक शुरूवात और एक ख़ात्मा हो जिसकी वजह से हिसाब किताब रखने में आसानी हो तो हज़रत उमर रज़ियल्लाहू अन्हु ने ग़ौर वे फ़िक्र करने के बाद सहाबा से मशवरा किया और ये तय किया कि मुहर्रम को इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना और ज़ुल हिज्जा को आख़री महीना मानेंगे। ताकि हिसाब किताब (Accounting) के लिए आसानी हो।

कैसे मुहर्रम को इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना चुना गया ?

अल्लामा इब्न हजर रहमतुल्लाह अलैहि ने फ़रमाया इस्लामी कैलेंडर की शुरूवात मुहर्रम से हुई रबी-उल- अव्वल से नही हुई जिस मे नबी की हिजरत हुई थी इस वजह से सहाबा ए किराम इस नतीजे पर पहुंचे के वो वाक़ियात जिनसे कैलेंडर की शुरूवात की जा सकती है वो 4 हो सकते हैं नबी की पैदाईश, नबुव्वत, हिजरत और वफ़ात फ़िर उन्होंने देखा के पैदाईश और नबुव्वत मिलने की तारीख़ों में इख़्तिलाफ़ पाया जाता हैं तारीख़ वफ़ात को इसलिए सही न समझा के ये तारीख़ मुसलमानों के ग़म ओ रंज को ताज़ा करती रहेगी लिहाज़ा सब हिजरत पर मुत्तफ़िक़ हो गए उन्होंने रबी उल अव्वल की बजाए मुहर्रम से इसलामी कैलेंडर की शुरूवात कि क्यूंकि हिजरत का इरादा मुहर्रम में हुआ था बै’अत अक़बा सानिया ज़ुल् हिज्जा के महीने में हुई थी जो हिजरत का पेश-ख़ेमा साबित हुई सबसे पहला चाँद जो उस बै’अत के बाद तुलू हुआ वो मुहर्रम का था चुनांचे मुनासिब यहीं ख़्याल किया गया के मुहर्रम से इसलामी कैलेंडर की शुरूवात कि जाए इब्न हजर रहमतुल्लाह अलैहि फ़रमाते है यही वो सब से ज़्यादा सही बात रही जिसकी वजह से इसलामी कैलेंडर की शुरूवात मुहर्रम के महीने से हुई (सीरत उमर ए फ़ारूक़ जिल्द नं 1 पेज नं 280 और 281 अल-सलाबी)

हज़रत उमर रज़ियल्लाहू के दौर में इस्लामी कैलेंडर की शुरूवात हुई उस्मान बिन अब्दुल्लाह फ़रमाते है मैंने सईद बिन मुसैब रहमतुल्लाह अलैहि से सुना उन्हों ने फ़रमाया सैय्यदना उमर रज़ियल्लाहू अन्हु ने अंसार और मुहाजिरीन को जमा किया और पूछा हम अपने (मुसलमानों) के कैलेंडर की शुरूवात कब से करे ? सय्यदना अली रज़ियल्लाहू अन्हु ने मशवरा दिया के जिस वक़्त नबी शिर्क की ज़मीन से निकल कर मदीना तशरीफ़ लाए उसी वक़्त से हमारी तारीख़ का आग़ाज़ होना चाहिए सय्यदना उमर रज़ियल्लाहू अन्हु ने ये मशवरा फ़ौरन क़ुबूल फ़रमा लिया।
(सीरत उमर ए फ़ारूक़ जिल्द नं 1 पेज नं 280 अल-सलाबी)

मुहर्रम को इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना रखने के पीछे हज़रत उमर रज़ियल्लाहू अन्हु की हिकमत ये थी अल्लाह के रसूल ﷺ नें मदीने के लिए ज़ुल हिज्जा के आख़री अय्याम मे हिजरत शुरू की और जब आप ﷺ मदीना पहुंचे उस दिन मुहर्रम की 1 तरीख़ थी तो हज़रत उमर रज़ियल्लाहू अन्हु ने सोचा क्यूँ ने हिजरत से यानि मुहर्रम की 1 तरीख़ से इस्लामी कैलेंडर की शुरुआत की जाए और इस तरह हज़रत उमर रज़ियल्लाहू अन्हु के दोर में इस्लामी कैलेंडर की शुरुआत हुई।
(अस सादिक़ुल अमीन पेज नं 282)

नोट:- जब से दुनिया बनी है तब से इस्लामी महीनों की गिनती 12 है रसूल अल्लाह ﷺ के ज़माने में भी इसी तरह था लेकिन शुरुवाती और आख़री महीना मुक़र्रर नहीं था बाद में ज़रूरत के मुताबिक़ हज़रत उमर रज़ियल्लाहू अन्हु के दोर में इस्लामी कैलेंडर की शुरुवात हुई।

टैग :मज़हबशिक्षा
शेयर करें :
Facebook Pinterest Whatsapp Whatsapp
◈  इस पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया दें :
Proud3
Happy0
Love0
Surprise1
Sad0
Angry0
जुबेर खान 'अकेला'
लेखकजुबेर खान 'अकेला'
Content Writer and Graphic Designer
मैं जुबेर खान, एक लेखक हूँ। कहानियाँ, कविताएँ और निबंध - मुझे हर शैली में अपने विचारों और भावनाओं को शब्दों में पिरोना पसंद है। मेरा लक्ष्य है अपने लेखन से पाठकों का मनोरंजन करना और उन्हें प्रेरित करना। आप मेरे लेख noorpost.com पर पढ़ सकते हैं, जहाँ मैं भारत और दुनिया की ताज़ा ख़बरों और विश्लेषण पर लिखता हूँ। आपके सुझावों का हमेशा स्वागत है!
कमेंट करें! कमेंट करें!

कमेंट करें! Cancel reply

You must be logged in to post a comment.

हमें फॉलो करें >>

FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe

सबसे अधिक पढ़ी गईं >>

🌟 इमाम अहमद इब्न हंबल: एक बहादुर योद्धा की कहानी जिसने इल्म और ईमान की मिसाल कायम की

20 मिनट में पढ़ें
289 लोगों ने देखा

डॉ. ज़ाकिर हुसैन: भारत के पहले मुस्लिम राष्ट्रपति की प्रेरणादायक कहानी

12 मिनट में पढ़ें
269 लोगों ने देखा

नासिर अहमद: वह शख्स जिसने आपकी डिजिटल दुनिया बदल दी!

10 मिनट में पढ़ें
82 लोगों ने देखा
8 Islamic Principles for Successful Business, in the Light of the Holy Quran and Hadith

सफल व्यापार के लिए 8 इस्लामी सिद्धांत, पवित्र कुरान और हदीस की रोशनी में

9 मिनट में पढ़ें
641 लोगों ने देखा

अहमद कथराडा: दक्षिण अफ्रीका के रंगभेद विरोधी आंदोलन के भारतीय मूल के नायक

14 मिनट में पढ़ें
29 लोगों ने देखा

मौलाना शाह अब्दुल कादिर लुधियानवी: 1857 की जंग-ए-आजादी के गुमनाम नायक

12 मिनट में पढ़ें
289 लोगों ने देखा

इमाम अल-बुखारी: इस्लामिक विद्वान और हदीस संकलनकर्ता

29 मिनट में पढ़ें
98 लोगों ने देखा

अल-इद्रीसी: मध्यकालीन विश्व का महान भूगोलवेत्ता और उनकी रोमांचक कहानियां

12 मिनट में पढ़ें
175 लोगों ने देखा

मौलाना अबुल आला मौदुदी: किताबों की ताकत से इस्लाम की सच्चाई को दुनिया तक पहुंचाने वाला शख्स

12 मिनट में पढ़ें
362 लोगों ने देखा

इमाम मुस्लिम: सहीह मुस्लिम के संकलनकर्ता

14 मिनट में पढ़ें
258 लोगों ने देखा
Avatar
Daily Hadith
Today at 12:00 PM

सम्बंधित टॉपिक >>

क्या ग़ुस्ल के बाद वुज़ू करना ज़रूरी है? ग़ुस्ल और वुज़ू के क्या फ़र्ज़ हैं?

5 मिनट में पढ़ें
64 लोगों ने देखा
Happy new year in islam

क्या आप भी न्यू ईयर मानाते हैं और इसके बावजूद ईमानवाला होने का दावा करते हैं ?

3 मिनट में पढ़ें
214 लोगों ने देखा

इस्माइल अल-जज़री: रॉबोटिक्स के पिता और आधुनिक इंजीनियरिंग के जनक

11 मिनट में पढ़ें
18 लोगों ने देखा
maulana abdul kalam azad

मदरसे के छात्र मौलाना अबुल कलाम आजाद की बरसी पर मनाया जाता है – राष्ट्रीय शिक्षा दिवस

1 मिनट में पढ़ें
175 लोगों ने देखा

महत्वपूर्ण लिंक्स

  • सहेजी गई पोस्ट
  • आपके लिए
  • पढ़े गए पोस्ट
  • पसंदीदा टॉपिक्स
  • मेरी प्रोफाइल
  • हमारे बारे में
  • हमारी सहायता करें
  • हमे विज्ञापन दें
  • भविष्य योजना
  • साइट के लेखक
  • संपर्क करें
  • गोपनीयता नीति
  • अस्वीकरण
  • सेवा की शर्तें
  • सुधार नीति

All content © NoorPost


News Video
Quiz
Tools
More

Quiz Categories

General Knowledge Test IQ Islamic Quiz Science History Fun Quiz

Tools & Utilities

Age Calc Converter QR Gen BMI Calc Search Love Calc Wishes

Explore More

About Us Donate Us Privacy Terms Contact Advertise Correction Disclaimer Future Plan Writers
adbanner
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

क्या पासवर्ड भूल गए?

Not a member? Sign Up