By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
NoorPostNoorPost
  • होम
  • न्यूज़
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • मुस्लिम दुनिया
  • इतिहास
    • मुस्लिम वैज्ञानिक
    • सामाजिक कार्यकर्ता
    • स्वतंत्रता सेनानी
    • उस्मानी साम्राज्य
    • जीवनी
  • वीडियो
  • ब्लॉग
  • मजहब
  • अन्य
    • खान-पान
    • स्वास्थ्य
    • शिक्षा
    • रोजगार
    • साइंस-टेक्नोलॉजी
      • मोबाइल
Sign In
नोटिफिकेशन और दिखाएं
Font Resizerआ
Font Resizerआ
NoorPostNoorPost
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • मुस्लिम दुनिया
  • इतिहास
  • खान-पान
  • ब्लॉग
  • मजहब
  • रोजगार
  • वीडियो
  • शिक्षा
  • साइंस-टेक्नोलॉजी
  • सोशल मीडिया
  • स्वास्थ्य
Search
  • प्रमुख पेज
    • होम
    • संपर्क करें
    • गोपनीयता नीति
    • अस्वीकरण
    • सर्च करें
  • मेरी चीजें
    • सुरक्षित पोस्ट
    • मेरे लिए
    • पढ़े गए पोस्ट
    • पसंदीदा टॉपिक्स
    • पसंदीदा लेखक/लेखिका
  • Categories
    • मुस्लिम दुनिया
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • इतिहास
    • खान-पान
    • ब्लॉग
    • मजहब
    • शिक्षा
    • स्वास्थ्य
    • रोजगार
    • वीडियो
    • साइंस-टेक्नोलॉजी
    • सोशल मीडिया
Sign In Sign In
Follow US
> इतिहास > स्वतंत्रता सेनानी > 1857 स्वतंत्रता संग्राम के एक गुमनाम नायक – शहीद शेख भिखारी

1857 स्वतंत्रता संग्राम के एक गुमनाम नायक – शहीद शेख भिखारी

एо अहमद
एо अहमद
एо अहमद
लेखकएо अहमद
Founder and Editor
मैं आफताब अहमद इस साइट पर एक लेखक हूं, मुझे विभिन्न शैलियों और विषयों पर लिखना पसंद है। मुझे ऐसा निबंध और ब्लॉग लिखना अच्छा लगता...
Follow:
Published: 27/08/2024
310 लोगों ने देखा
No Comments
शेयर
5 मिनट में पढ़ें

शेख भिखारी (Sheikh Bikhari) का जन्म 2 अक्टूबर 1819 में झारखंड के ज़िला रांची के हुप्ते नामी एक गांव में एक बुनकर अंसारी परिवार में हुआ था। शैख़ भिखारी के वालिद का नाम शैख़ बुलन्द था। शैख़ भिकारी ने अपने गांव के स्कूल से ही पूरी तअलीम हासिल किया था और फिर छोटा नागपुर के महाराज की सेना में शामिल हो गए थे। बाद में वे बड़कागढ़ सूबे के हाकिम ठाकुर विश्वनाथ सहदेव की दावत पर वहां गए और जल्द ही वह औदाघर सूबे के दीवान बन गए।

1857 की क्रांति में योगदान –

सन् 1856 ई में जब अंग्रेजों ने राजा महाराजाओं पर चढ़ाई करके छल कपट से उनके राज्य को हथिया रहे थे तो बाकी हिंदुस्तान के बाकी राजा-महाराजाओं अंग्रेजों से भय और चिंता में पड़ गए। ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव भी इन्ही में से थे, तो उन्होंने अपने वजीर पाण्डे गणपत राय, दीवान शेख भिखारी, टिकैत उमराँव सिंह से मशवरा किया। इन सभी ने अंग्रेजों के खिलाफ जंग करने की ठान ली तो 1857 के क्रांति के नेतृत्वकर्ताओं में से एक बाबू कुँवर सिंह से पत्राचार किया। 

शैख़ भिखारी ने करामत अली अंसारी, अमानत अली अंसारी और शैख़ होरे अंसारी जैसे अपने ख़ास दूतों को अलग अलग सूबों में भेजा ताकि वहां के हाकिमों को भी एकजुट किया जा सके। इस बीच में शेख भिखारी ने बड़कागढ़ की फौज में नौजवानों को भरती करना और उन्हें अंग्रेजों से लड़ने की ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया। 

अचानक 1857 की क्रांति भड़क उठी। रामगढ़ के रेजिमेंट ने अपने अंग्रेज अफसर को मार डाला। वहां की कुछ सिपाही और राम विजय सिंह और नादिर अली खान भाग के शेख भिखारी की फौज में आकर मिल गये। शैख़ भिखारी ने ईस्ट इंडिया कंपनी के राम विजय सिंह और नादिर अली खान की मदद से ज़िला हजारीबाग के रामगढ़ में अंग्रेजों के सेना मुख्यालय पर हमला किया और लड़ाई जीत ली। ब्रिटिश कप्तान ग्राहम और उनके तीन अधिकारी हजारीबाग की ओर भाग गए और विद्रोहियों ने उनकी बंदूकें अपने कब्जे में ले लीं, शेख भिखारी ने वहां की तोपों को रांची की ओर मोड़ दिया। 2 अगस्त, 1857 को चुत्तुपलू की सेना ने रांची शहर पर नियंत्रण स्थापित किया। रांची, चाईबासा, संथाल परगना के जिलों से अंग्रेज भाग खड़े हुए।

इसी बीच अंग्रेजों की फौज जनरल मैकडोना के नेतृत्व में रामगढ़ पहुंच गयी और चुत्तुपलू पहाड़ के रास्ते से रांची आने लगी। उनको रोकने के लिए शेख भिखारी, टिकैत उमराव सिंह अपनी फौज लेकर चुत्तुपलू पहाड़ी पहुंच गये और अंग्रेजों का रास्ता रोक दिया। 

शेख भिखारी ने चुत्तुपलू की घाटी पार करनेवाला पुल तोड़ दिया और सड़क के पेड़ों को काटकर रास्ता जाम कर दिया। शेख भिखारी की फौज ने अंग्रेजों पर गोलियों की बौछार कर अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिये। यह लड़ाई कई दिनों तक चली। शेख भिखारी के पास गोलियां खत्म होने लगी तो शेख भिखारी ने अपनी फौज को पत्थर लुढ़काने का हुक्म दिया। इससे अंग्रेजों फौजी कुचलकर मरने लगे। यह देखकर जनरल मैकडोन ने मुकामी लोगों को मिलाकर चुत्तुपलू पहाड़ पर चढ़ने के लिए दूसरे रास्ते की जानकारी करली, फिर उस खुफिया रास्ते से चुत्तुपलू पहाड़ पर चढ़ गये। 

अंग्रेजों ने शेख भिखारी एवं टिकैत उमराव सिंह को 6 जनवरी 1858 को घेर कर गिरफ्तार कर लिया और 7 जनवरी 1858 को उसी जगह चुत्तुपलू घाटी पर फौजी अदालत लगाकर मैकडोना ने शेख भिखारी और उनके साथी टिकैत उमरांव को फांसी का फैसला सुनाया। 8 जनवरी 1858 को शेख भिखारी और टिकैत उमराव सिंह को चुत्तुपलू पहाड़ी के बरगद के पेड़ से लटका कर फांसी दे दी गयी।

क्रांतिकारियों को डराने के लिए बरगद के पेड़ पर दोनों के शव लटकाए गए थे, उस बरगद के पेड़ को फंसीरी बरगद कहा जाता है। हालांकि उनकी वीरता और बलिदान की कहानी स्थानीय लोगों और रांची शहर के चौराहे पर उनकी मूर्तियों की याद में उकेरी गई है, लेकिन देश के बाकी हिस्सों तथा राष्ट्रीय कथा और आधुनिक इतिहास की किताबों में शेख भिखारी अज्ञात और गुमनाम हैं।

Freedom fighter Sheikh Bhikhari
टैग :मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानी
शेयर करें :
Facebook Pinterest Whatsapp Whatsapp
◈  इस पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया दें :
Proud2
Happy0
Love0
Surprise0
Sad0
Angry0
एо अहमद
लेखकएо अहमद
Founder and Editor
Follow:
मैं आफताब अहमद इस साइट पर एक लेखक हूं, मुझे विभिन्न शैलियों और विषयों पर लिखना पसंद है। मुझे ऐसा निबंध और ब्लॉग लिखना अच्छा लगता है जो मेरे पाठकों को चिंतन और प्रेरणा देती हैं।
कमेंट करें! कमेंट करें!

कमेंट करें! Cancel reply

You must be logged in to post a comment.

हमें फॉलो करें >>

FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe

सबसे अधिक पढ़ी गईं >>

🌟 इमाम अहमद इब्न हंबल: एक बहादुर योद्धा की कहानी जिसने इल्म और ईमान की मिसाल कायम की

20 मिनट में पढ़ें
289 लोगों ने देखा

डॉ. ज़ाकिर हुसैन: भारत के पहले मुस्लिम राष्ट्रपति की प्रेरणादायक कहानी

12 मिनट में पढ़ें
269 लोगों ने देखा

नासिर अहमद: वह शख्स जिसने आपकी डिजिटल दुनिया बदल दी!

10 मिनट में पढ़ें
82 लोगों ने देखा
8 Islamic Principles for Successful Business, in the Light of the Holy Quran and Hadith

सफल व्यापार के लिए 8 इस्लामी सिद्धांत, पवित्र कुरान और हदीस की रोशनी में

9 मिनट में पढ़ें
641 लोगों ने देखा

अहमद कथराडा: दक्षिण अफ्रीका के रंगभेद विरोधी आंदोलन के भारतीय मूल के नायक

14 मिनट में पढ़ें
29 लोगों ने देखा

मौलाना शाह अब्दुल कादिर लुधियानवी: 1857 की जंग-ए-आजादी के गुमनाम नायक

12 मिनट में पढ़ें
289 लोगों ने देखा

इमाम अल-बुखारी: इस्लामिक विद्वान और हदीस संकलनकर्ता

29 मिनट में पढ़ें
98 लोगों ने देखा

अल-इद्रीसी: मध्यकालीन विश्व का महान भूगोलवेत्ता और उनकी रोमांचक कहानियां

12 मिनट में पढ़ें
175 लोगों ने देखा

इमाम मुस्लिम: सहीह मुस्लिम के संकलनकर्ता

14 मिनट में पढ़ें
258 लोगों ने देखा

मौलाना अबुल आला मौदुदी: किताबों की ताकत से इस्लाम की सच्चाई को दुनिया तक पहुंचाने वाला शख्स

12 मिनट में पढ़ें
362 लोगों ने देखा
Avatar
Daily Hadith
Today at 12:00 PM

सम्बंधित टॉपिक >>

Allama Muhammad Iqbal

अल्लामा मुहम्मद इकबाल, एक संक्षिप्त जीवन परिचय।

3 मिनट में पढ़ें
358 लोगों ने देखा
Piri-Reis

पिरी रीस जिन्होंने बनाया पूरी दुनिया का पहला नक्शा

7 मिनट में पढ़ें
164 लोगों ने देखा

महान मुस्लिम वैज्ञानिक इब्न अल नफीस जिन्होंने पता लगाया की दिल कैसे काम करता है।

6 मिनट में पढ़ें
49 लोगों ने देखा

असगरी बेगम जिन्हे अंग्रेजों ने जिंदा जला दिया।

2 मिनट में पढ़ें
234 लोगों ने देखा

महत्वपूर्ण लिंक्स

  • सहेजी गई पोस्ट
  • आपके लिए
  • पढ़े गए पोस्ट
  • पसंदीदा टॉपिक्स
  • मेरी प्रोफाइल
  • हमारे बारे में
  • हमारी सहायता करें
  • हमे विज्ञापन दें
  • भविष्य योजना
  • साइट के लेखक
  • संपर्क करें
  • गोपनीयता नीति
  • अस्वीकरण
  • सेवा की शर्तें
  • सुधार नीति

All content © NoorPost


News Video
Quiz
Tools
More

Quiz Categories

General Knowledge Test IQ Islamic Quiz Science History Fun Quiz

Tools & Utilities

Age Calc Converter QR Gen BMI Calc Search Love Calc Wishes

Explore More

About Us Donate Us Privacy Terms Contact Advertise Correction Disclaimer Future Plan Writers
 

Loading Comments...
 

You must be logged in to post a comment.

    adbanner
    Welcome Back!

    Sign in to your account

    Username or Email Address
    Password

    क्या पासवर्ड भूल गए?

    Not a member? Sign Up