By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
NoorPostNoorPost
  • होम
  • न्यूज़
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • मुस्लिम दुनिया
  • इतिहास
    • मुस्लिम वैज्ञानिक
    • सामाजिक कार्यकर्ता
    • स्वतंत्रता सेनानी
    • उस्मानी साम्राज्य
    • जीवनी
  • वीडियो
  • ब्लॉग
  • मजहब
  • अन्य
    • खान-पान
    • स्वास्थ्य
    • शिक्षा
    • रोजगार
    • साइंस-टेक्नोलॉजी
      • मोबाइल
Sign In
नोटिफिकेशन और दिखाएं
Font Resizerआ
Font Resizerआ
NoorPostNoorPost
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • मुस्लिम दुनिया
  • इतिहास
  • खान-पान
  • ब्लॉग
  • मजहब
  • रोजगार
  • वीडियो
  • शिक्षा
  • साइंस-टेक्नोलॉजी
  • सोशल मीडिया
  • स्वास्थ्य
Search
  • प्रमुख पेज
    • होम
    • संपर्क करें
    • गोपनीयता नीति
    • अस्वीकरण
    • सर्च करें
  • मेरी चीजें
    • सुरक्षित पोस्ट
    • मेरे लिए
    • पढ़े गए पोस्ट
    • पसंदीदा टॉपिक्स
    • पसंदीदा लेखक/लेखिका
  • Categories
    • मुस्लिम दुनिया
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • इतिहास
    • खान-पान
    • ब्लॉग
    • मजहब
    • शिक्षा
    • स्वास्थ्य
    • रोजगार
    • वीडियो
    • साइंस-टेक्नोलॉजी
    • सोशल मीडिया
Sign In Sign In
Follow US
> इतिहास > स्वतंत्रता सेनानी > मुंदार खातून: रानी लक्ष्मीबाई की महिला मित्र जिन्होंने देश के लिए खुद को शहीद कर दिया

मुंदार खातून: रानी लक्ष्मीबाई की महिला मित्र जिन्होंने देश के लिए खुद को शहीद कर दिया

एо अहमद
एо अहमद
एо अहमद
लेखकएо अहमद
Founder and Editor
मैं आफताब अहमद इस साइट पर एक लेखक हूं, मुझे विभिन्न शैलियों और विषयों पर लिखना पसंद है। मुझे ऐसा निबंध और ब्लॉग लिखना अच्छा लगता...
Follow:
Published: 19/06/2026
2K लोगों ने देखा
No Comments
शेयर
2 मिनट में पढ़ें

मुंदार खातून (जिन्हें तारीख़ में मुंदार, मूंंदर या सुंदर-मुंदर भी कहा गया है) रानी लक्ष्मीबाई की सिर्फ एक मुहाफ़िज़ (बॉडीगार्ड) नहीं थीं, बल्कि उनकी सबसे वफ़ादार दोस्त, हमराज़ और आखिरी सांस तक साथ निभाने वाली जांबाज खातून थीं।
1857 की पहली जंगे-आज़ादी में मुंदार का रोल और उनकी वफ़ादारी हिंदुस्तान की तारीख़ का एक बेहद शानदार हिस्सा है। उनके बारे में पुख्ता तारीख़ी हक़ीक़तों (ऐतिहासिक सबूतों) के मुताबिक पूरी जानकारी नीचे दी गई है:

हाईलाइट्स
  • शुरुआती ज़िंदगी और रानी से ताल्लुक
  • 1857 की जंग और अटूट वफ़ादारी
  • शहादत: आख़िरी दिन की तारीख़ी हक़ीक़त
  • तारीख़ में अहमियत

शुरुआती ज़िंदगी और रानी से ताल्लुक

मुंदार एक मुस्लिम घराने से थीं। वह बचपन से या फिर रानी लक्ष्मीबाई की शादी के बाद से ही उनके साथ झांसी के महल में आ गई थीं। रानी लक्ष्मीबाई ने झांसी में औरतों की एक खास फौजी टुकड़ी तैयार की थी, जिसमें मुंदार और काशीबाई जैसी लड़कियों को घुड़सवारी, तलवारबाज़ी और जंग के हुनर में माहिर किया गया था। मुंदार इस महिला फौज की एक मजबूत कमान थीं।

1857 की जंग और अटूट वफ़ादारी

जब मार्च 1858 में ब्रिटिश जनरल ह्यूरोज ने झांसी के किले को घेरा, तब मुंदार ने रानी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जंग लड़ी।

जब झांसी के गद्दार दुलहाजू की वजह से अंग्रेजों ने किले के एक दरवाज़े को खोल दिया और रानी को किला छोड़ना पड़ा, तब मुंदार, काशीबाई, गुलाम गौस खान और खुदा बख्श जैसे चुनिंदा वफ़ादारों ने रानी को चारों तरफ से घेरकर हिफ़ाज़त से बाहर निकाला।

झांसी से कालपी और फिर ग्वालियर तक के मुश्किल सफ़र और खौफनाक जंगों में मुंदार साए की तरह रानी लक्ष्मीबाई के साथ रहीं।

शहादत: आख़िरी दिन की तारीख़ी हक़ीक़त

मुंदार की शहादत 17 जून 1858 को ग्वालियर के पास कोटा-की-सराय के मैदान में हुई, जो रानी लक्ष्मीबाई की शहादत (18 जून) से ठीक एक दिन पहले या लगभग साथ में ही हुई थी।
ब्रिटिश दस्तावेज़ों और नेशनल आर्काइव्स ऑफ इंडिया (National Archives of India) में दर्ज उस वक्त के गवर्नर जनरल के एजेंट रॉबर्ट हैमिल्टन की 30 अक्टूबर 1858 की रिपोर्ट के मुताबिक:

“रानी लक्ष्मीबाई एक घोड़े पर सवार थीं। उनके साथ एक और मुस्लिम खातून (मुंदार) सवार थीं, जो कई सालों से उनकी खादिम (दासी) और दोस्त थीं। दोनों ही बंदूक की गोलियां लगने की वजह से लगभग एक साथ घोड़े से नीचे गिर गईं।”

तारीख़दानों के ब्योरे के मुताबिक मुंदार को अंग्रेजों की गोली लगी और उन्होंने जंग के मैदान में ही दम तोड़ दिया। अपनी सबसे प्यारी दोस्त मुंदार को अपनी आंखों के सामने दम तोड़ते देख रानी लक्ष्मीबाई बेहद गुस्से में आ गई थीं और उन्होंने उस ब्रिटिश टुकड़ी पर जोरदार हमला बोल दिया था।

तारीख़ में अहमियत

मुंदार खातून का किरदार इस बात की जीती-जागती मिसाल है कि 1857 की क्रांति में मज़हब की दीवारें कहीं आड़े नहीं आईं। वह रानी लक्ष्मीबाई के सुख-दुख की साथी थीं—महल के अंदर दोस्त और मैदान-ए-जंग में मुहाफ़िज़।
अमृतलाल नागर और वृंदावनलाल वर्मा जैसे मशहूर लेखकों ने अपने उपन्यासों और तारीख़ी रिसर्च में मुंदार के हौसले और रानी के प्रति उनके बेलोस प्यार (निःस्वार्थ प्रेम) को खास तौर पर बयां किया है।

नूर पोस्ट का व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करें
टैग :स्वतंत्रता सेनानी
शेयर करें :
Facebook Pinterest Whatsapp Whatsapp
◈  इस पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया दें :
Proud11
Happy0
Love1
Surprise2
Sad0
Angry0
एо अहमद
लेखकएо अहमद
Founder and Editor
Follow:
मैं आफताब अहमद इस साइट पर एक लेखक हूं, मुझे विभिन्न शैलियों और विषयों पर लिखना पसंद है। मुझे ऐसा निबंध और ब्लॉग लिखना अच्छा लगता है जो मेरे पाठकों को चिंतन और प्रेरणा देती हैं।
कमेंट करें! कमेंट करें!

कमेंट करें! Cancel reply

You must be logged in to post a comment.

हमें फॉलो करें >>

FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe

सबसे अधिक पढ़ी गईं >>

पीर मुहम्मद मूनिस

पीर मुहम्मद मूनिस: क़लम का सत्याग्रही

5 मिनट में पढ़ें
8 लोगों ने देखा

मुसलमान कुर्बानी क्यों करते हैं? कुर्बानी का इतिहास क्या है?

8 मिनट में पढ़ें
307 लोगों ने देखा

सिराजुद्दौला: बंगाल का अंतिम स्वतंत्र नवाब, जीवन, कार्य और प्लासी की लड़ाई

12 मिनट में पढ़ें
21 लोगों ने देखा

किताब-उल-हिन्द: भारत के इतिहास और संस्कृति का एक ऐतिहासिक दस्तावेज

11 मिनट में पढ़ें
31 लोगों ने देखा

शहद: एक प्राकृतिक एंटीबायोटिक, इसके फायदे और कुरान-हदीस में इसकी अहमियत।

6 मिनट में पढ़ें
1.7K लोगों ने देखा

इस्लाम को बदनाम करने के लिए कैसे कुछ अरबी शब्दों के मतलब को तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा रहा है।

276 मिनट में पढ़ें
67 लोगों ने देखा
draculas-real-story-in-hindi

कौन था ड्रैकुला? एर्तुग़रुल से क्या था ड्रेकुला का कनेक्शन?

7 मिनट में पढ़ें
120 लोगों ने देखा

अल-इद्रीसी: मध्यकालीन विश्व का महान भूगोलवेत्ता और उनकी रोमांचक कहानियां

12 मिनट में पढ़ें
211 लोगों ने देखा
Human rights in islam in hindi

दुनिया में सबसे पहले मानवाधिकार (Human rights) इस्लाम में निर्धारित किया गया।

10 मिनट में पढ़ें
777 लोगों ने देखा
8 Islamic Principles for Successful Business, in the Light of the Holy Quran and Hadith

सफल व्यापार के लिए 8 इस्लामी सिद्धांत, पवित्र कुरान और हदीस की रोशनी में

9 मिनट में पढ़ें
669 लोगों ने देखा
अवतार
Daily Hadith
आज दोपहर 12:00 बजे

सम्बंधित टॉपिक >>

हज़रत खालिद बिन वलीद को जानिये जिन्होंने अपने समय के सुपर पावर रोमन साम्राज्य और पर्शियन साम्राज्य को धूल चटाई।

6 मिनट में पढ़ें
1.5K लोगों ने देखा

इंकलाब जिंदाबाद का नारा देने वाले क्रांतिकारी: मौलाना हसरत मोहानी

13 मिनट में पढ़ें
315 लोगों ने देखा
last-mugal-emperor-and-freedom-fighter-bahadur-shah-jafar

1857 क्रांति के महानायक अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह ज़फर

4 मिनट में पढ़ें
130 लोगों ने देखा

सदभावना के पक्षधर स्वतंत्रता सेनानी रहमतुल्लाह मोहम्मद सयानी का जीवन और योगदान

3 मिनट में पढ़ें
101 लोगों ने देखा

महत्वपूर्ण लिंक्स

  • सहेजी गई पोस्ट
  • आपके लिए
  • पढ़े गए पोस्ट
  • पसंदीदा टॉपिक्स
  • मेरी प्रोफाइल
  • हमारे बारे में
  • हमारी सहायता करें
  • हमे विज्ञापन दें
  • भविष्य योजना
  • साइट के लेखक
  • संपर्क करें
  • गोपनीयता नीति
  • अस्वीकरण
  • सेवा की शर्तें
  • सुधार नीति

All content © NoorPost


Video
Quiz
Home
Tools
More

Quiz Categories

General Knowledge Test IQ Islamic Quiz Science History Fun Quiz

Tools & Utilities

Age Calc Converter QR Gen BMI Calc Search Love Calc Wishes

Explore More

About Us Donate Us Privacy Terms Contact Advertise Correction Disclaimer Future Plan Writers

Loading Comments...

You must be logged in to post a comment.

    Welcome Back!

    Sign in to your account

    Username or Email Address
    Password

    क्या पासवर्ड भूल गए?

    Not a member? Sign Up