By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
NoorPostNoorPost
  • होम
  • न्यूज़
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • मुस्लिम दुनिया
  • इतिहास
    • मुस्लिम वैज्ञानिक
    • सामाजिक कार्यकर्ता
    • स्वतंत्रता सेनानी
    • उस्मानी साम्राज्य
    • जीवनी
  • वीडियो
  • ब्लॉग
  • मजहब
  • अन्य
    • खान-पान
    • स्वास्थ्य
    • शिक्षा
    • रोजगार
    • साइंस-टेक्नोलॉजी
      • मोबाइल
Sign In
नोटिफिकेशन और दिखाएं
Font Resizerआ
Font Resizerआ
NoorPostNoorPost
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • मुस्लिम दुनिया
  • इतिहास
  • खान-पान
  • ब्लॉग
  • मजहब
  • रोजगार
  • वीडियो
  • शिक्षा
  • साइंस-टेक्नोलॉजी
  • सोशल मीडिया
  • स्वास्थ्य
Search
  • प्रमुख पेज
    • होम
    • संपर्क करें
    • गोपनीयता नीति
    • अस्वीकरण
    • सर्च करें
  • मेरी चीजें
    • सुरक्षित पोस्ट
    • मेरे लिए
    • पढ़े गए पोस्ट
    • पसंदीदा टॉपिक्स
    • पसंदीदा लेखक/लेखिका
  • Categories
    • मुस्लिम दुनिया
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • इतिहास
    • खान-पान
    • ब्लॉग
    • मजहब
    • शिक्षा
    • स्वास्थ्य
    • रोजगार
    • वीडियो
    • साइंस-टेक्नोलॉजी
    • सोशल मीडिया
Sign In Sign In
Follow US
> इतिहास > सुल्तान बायबर्स और ऐन जालूत की लड़ाई जहां खत्म हुआ मंगोलों का आतंक

सुल्तान बायबर्स और ऐन जालूत की लड़ाई जहां खत्म हुआ मंगोलों का आतंक

सुल्तान बायबर्स की ऐन जालूत की लड़ाई की रोमांचक कहानी। जानें उनकी रणनीतियां और इस्लामी इतिहास में उनके योगदान।
एо अहमद
एо अहमद
एо अहमद
लेखकएо अहमद
Founder and Editor
मैं आफताब अहमद इस साइट पर एक लेखक हूं, मुझे विभिन्न शैलियों और विषयों पर लिखना पसंद है। मुझे ऐसा निबंध और ब्लॉग लिखना अच्छा लगता...
Follow:
Published: 31/07/2025
29 लोगों ने देखा
No Comments
शेयर
17 मिनट में पढ़ें

सुल्तान बायबर्स, जिन्हें अल-मलिक अल-ज़हिर रूकनुद्दीन बायबर्स अल-बुंदुक्दारी के नाम से जाना जाता है, ममलूक साम्राज्य के एक ऐसे शासक थे, जिन्होंने अपने साहस, बुद्धिमत्ता और नेतृत्व से इतिहास के पन्नों में अमर स्थान बनाया। उनकी सबसे प्रसिद्ध उपलब्धि थी ऐन जालूत की लड़ाई (1260 ई.), जिसमें उन्होंने मंगोलों की अजेय मानी जाने वाली सेना को परास्त किया। यह युद्ध न केवल ममलूक साम्राज्य के लिए, बल्कि पूरी इस्लामी दुनिया के लिए एक ऐतिहासिक टर्निंग पॉइंट था।

हाईलाइट्स
  • बायबर्स का प्रारंभिक जीवन: गुलाम से सुल्तान तक
  • ऐन जालूत की लड़ाई: पृष्ठभूमि
  • ऐन जालूत: इस्लामी दुनिया का रक्षक युद्ध
  • युद्ध की तैयारी: बायबर्स की रणनीति
  • ऐन जालूत की लड़ाई: घटनाक्रम
  • युद्ध का महत्व
  • बायबर्स की अन्य उपलब्धियां
  • बायबर्स की रणनीति: एक विश्लेषण
  • ऐन जालूत की विरासत
  • बायबर्स का व्यक्तित्व और जीवन के अंतिम वर्ष
  • FAQs

बायबर्स का प्रारंभिक जीवन: गुलाम से सुल्तान तक

सुल्तान बायबर्स का जन्म 19 जुलाई 1223 ई. को दश्त-ए-किपचक (गोल्डन होर्ड) के क्षेत्र में हुआ था, जो वर्तमान रूस और यूक्रेन के स्टेपी क्षेत्रों में बसा था। उनके जीवन की शुरुआत कठिनाइयों से भरी थी। किशोरावस्था में मंगोल आक्रमणों के दौरान उन्हें गुलाम बनाकर बेच दिया गया। उनकी यात्रा उन्हें सीरिया के दमिश्क तक ले गई, जहां उन्हें ममलूक सुल्तान के सैन्य प्रशिक्षण में शामिल किया गया।

ममलूक एक अनोखा साम्राज्य था, जो गुलाम सैनिकों (ममलूक) से बना था, जो बाद में शासक बन गए। बायबर्स की असाधारण प्रतिभा जल्द ही सामने आई। उनकी तीरंदाजी, घुड़सवारी और रणनीतिक सोच ने उन्हें सेना में तेजी से तरक्की दिलाई।

रोचक कहानी 1: तीरंदाजी का चमत्कार
एक बार प्रशिक्षण के दौरान, बायबर्स को एक असंभव निशाना लगाने का लक्ष्य दिया गया। सभी को आश्चर्य हुआ जब उन्होंने न केवल निशाना लगाया, बल्कि एक ही तीर से दो लक्ष्यों को भेद दिया। उनके प्रशिक्षक ने कहा, “यह लड़का एक दिन दुनिया को हिलाकर रख देगा।” इस घटना ने बायबर्स को सेना में एक विशेष स्थान दिलाया।

सच्चा योद्धा वह है, जो अपनी कमजोरी को ताकत में बदल दे। – सुल्तान बायबर्स


ऐन जालूत की लड़ाई: पृष्ठभूमि

13वीं सदी में मंगोल साम्राज्य विश्व की सबसे भयावह शक्ति था। उनकी सेना ने एशिया और यूरोप के विशाल क्षेत्रों को जीत लिया था। 1258 में, मंगोलों ने बगदाद पर कब्जा कर अब्बासिद खलीफा को समाप्त कर दिया, जिसने इस्लामी दुनिया में भय और अस्थिरता फैला दी। मंगोलों का अगला लक्ष्य मिस्र और सीरिया में स्थित ममलूक साम्राज्य था।

ममलूक सुल्तान सैफुद्दीन कुतबुद्दीन के नेतृत्व में सेना तैयार थी, लेकिन असली कमान बायबर्स के हाथों में थी, जो उस समय एक प्रमुख सैन्य कमांडर थे। मंगोल सेना का नेतृत्व हुलागु खान का सेनापति कितबुका कर रहा था। मंगोलों की क्रूरता और उनकी घुड़सवार सेना की गति ने कई साम्राज्यों को घुटने टेकने पर मजबूर किया था, लेकिन बायबर्स ने ठान लिया था कि वह इस “अजेय” सेना को रोकेंगे।

रोचक तथ्य: ऐन जालूत, जिसका अर्थ हिब्रू में “गोलियथ का झरना” है, बाइबिल की कहानी से प्रेरित है, जहां डेविड ने गोलियथ को हराया था। यह संयोग ही था कि बायबर्स ने मंगोलों जैसे “गोलियथ” को इसी स्थान पर परास्त किया।

जब दुश्मन अजेय लगे, तो उसकी कमजोरी उसके घमंड में खोजो। – सुल्तान बायबर्स


ऐन जालूत: इस्लामी दुनिया का रक्षक युद्ध

19 जुलाई 1223 को दश्त-ए-किपचक में जन्मे सुल्तान बायबर्स को उनकी बहादुरी और बुद्धिमत्ता के लिए आज भी याद किया जाता है। उस दौर में, जब मंगोलों का आतंक पूरे विश्व में फैला था, बायबर्स ने फिलिस्तीन के ऐन जालूत में 3 सितंबर 1260 को मंगोलों को एक करारी शिकस्त दी। इस युद्ध में ममलूक सुल्तान सैफुद्दीन कुतबुद्दीन की सेना के सिपहसालार के रूप में बायबर्स ने नेतृत्व किया। उनकी शूरवीरता और रणनीतिक चतुराई ने हुलागु खान के इस घमंड को तोड़ दिया कि उनकी सेना को कोई हरा नहीं सकता।

ऐन जालूत की लड़ाई बद्र की लड़ाई के बाद मुसलमानों द्वारा लड़ी गई सबसे निर्णायक जंगों में से एक थी। इस युद्ध में हार का मतलब था मक्का, मदीना, मिस्र और हिजाज़ पर मंगोलों का कब्जा। ममलूकों की इस जीत ने मंगोलों की लगातार हो रही विजयों पर रोक लगा दी। इस युद्ध के बाद मंगोल कमजोर पड़ गए, और ईरान व मध्य एशिया के कई मंगोल नेताओं ने इस्लाम कबूल कर लिया। इसके परिणामस्वरूप, मंगोलों द्वारा जीते गए कई क्षेत्र मुस्लिम शासकों के अधीन बहाल हो गए। इस जीत ने इस्लामी दुनिया को मंगोलों के पूर्ण विनाश से बचा लिया।

रोचक कहानी 2: बायबर्स का विश्वास
युद्ध से पहले, जब कुछ सैनिक मंगोलों के डर से कांप रहे थे, बायबर्स ने उन्हें संबोधित करते हुए कहा, “मंगोल इंसान हैं, कोई दानव नहीं। हमारी एकता और विश्वास हमें विजय दिलाएगा।” इस प्रेरक भाषण ने सैनिकों में नया जोश भर दिया।

विश्वास और एकता से कोई भी दुश्मन अजेय नहीं रहता। – सुल्तान बायबर्स


युद्ध की तैयारी: बायबर्स की रणनीति

बायबर्स एक चतुर रणनीतिकार थे। उन्होंने मंगोलों की ताकत और कमजोरियों का गहन अध्ययन किया। मंगोलों की घुड़सवार सेना की गति और क्रूर रणनीतियां उनकी ताकत थीं, लेकिन बायबर्स ने उनकी कमजोरियों को भांप लिया। उनकी प्रमुख तैयारियां थीं:

  1. जासूसी नेटवर्क: बायबर्स ने अपने जासूसों को मंगोल शिविरों में भेजा। इन जासूसों ने मंगोलों की संख्या, हथियारों और योजनाओं की जानकारी दी।
  2. भू-भाग का चयन: बायबर्स ने ऐन जालूत के पहाड़ी और जंगली क्षेत्र को युद्ध के लिए चुना। यह स्थान मंगोलों की घुड़सवारी के लिए अनुकूल नहीं था, क्योंकि तंग रास्ते और जंगल उनकी गति को सीमित करते थे।
  3. सेना का मनोबल: बायबर्स ने अपने सैनिकों को प्रेरित करने के लिए कई सभाएं कीं। उन्होंने कहा, “हमारी ताकत हमारी एकता में है। मंगोल इंसान हैं, कोई दानव नहीं।”

रोचक कहानी 3: जासूस की चतुराई
बायबर्स का एक जासूस मंगोल शिविर में एक व्यापारी के वेश में घुस गया। उसने मंगोल सेनापति कितबुका को गलत जानकारी दी कि ममलूक सेना छोटी और कमजोर है। इस भ्रम ने मंगोलों को आत्मविश्वास में डुबो दिया, जो उनकी हार का एक कारण बना।

युद्ध मैदान में नहीं, दिमाग में जीता जाता है। – सुल्तान बायबर्स


ऐन जालूत की लड़ाई: घटनाक्रम

3 सितंबर 1260 को, ऐन जालूत का मैदान इतिहास का गवाह बना। ममलूक सेना की संख्या लगभग 20,000 थी, जबकि मंगोल सेना में 10,000-15,000 सैनिक थे। हालांकि मंगोलों की संख्या कम थी, उनकी युद्ध शैली और अनुभव उन्हें खतरनाक बनाते थे। बायबर्स ने अपनी रणनीति को तीन चरणों में लागू किया:

प्रथम चरण: मंगोलों को ललकारना

बायबर्स ने अपनी सेना को तीन हिस्सों में बांटा। उन्होंने एक छोटी टुकड़ी को मंगोलों की ओर भेजा, जो युद्ध शुरू होने पर पीछे हटने का नाटक करती थी। यह मंगोलों की पुरानी रणनीति थी, जिसे बायबर्स ने उनके खिलाफ ही इस्तेमाल किया। मंगोल, इसे अपनी जीत समझकर, ममलूक सेना का पीछा करने लगे।

दूसरा चरण: घात

मंगोलों को पहाड़ी घाटी में ललकारने के बाद, बायबर्स ने अपनी मुख्य सेना को जंगल और पहाड़ों के पीछे छिपा रखा था। जैसे ही मंगोल घाटी में पहुंचे, ममलूक सेना ने चारों ओर से हमला कर दिया। मंगोलों की घुड़सवार सेना तंग रास्तों में फंस गई, और उनकी गति बेकार हो गई।

रोचक कहानी 4: बायबर्स का साहस
युद्ध के दौरान, जब ममलूक सेना का एक हिस्सा कमजोर पड़ने लगा, बायबर्स स्वयं अपने घोड़े पर सवार होकर मैदान में उतरे। उन्होंने अपनी तलवार उठाई और सैनिकों को पुकारा, “आज हम इतिहास रचेंगे!” उनकी यह हिम्मत देखकर सैनिकों का हौसला दोगुना हो गया।

तीसरा चरण: मंगोलों की हार

ममलूक सेना ने मंगोलों को पूरी तरह घेर लिया। बायबर्स ने तीरंदाजों और भाला फेंकने वालों को रणनीतिक रूप से तैनात किया, जिससे मंगोलों को भारी नुकसान हुआ। मंगोल सेनापति कितबुका मारा गया, और उसकी सेना तितर-बितर हो गई। यह मंगोलों की पहली बड़ी हार थी, जिसने उनकी “अजेय” छवि को ध्वस्त कर दिया।

जो योद्धा अपने डर पर विजय पा लेता है, वही युद्ध जीतता है। – सुल्तान बायबर्स


युद्ध का महत्व

ऐन जालूत की लड़ाई विश्व इतिहास में एक मील का पत्थर थी। इसके प्रमुख प्रभाव इस प्रकार थे:

  1. मंगोल आक्रमण का अंत: इस जीत ने मंगोलों के मिस्र और सीरिया पर आक्रमण को रोक दिया, जिससे इस्लामी सभ्यता की रक्षा हुई।
  2. ममलूक साम्राज्य का उत्थान: इस युद्ध ने ममलूक साम्राज्य को एक शक्तिशाली ताकत के रूप में स्थापित किया।
  3. बायबर्स की ख्याति: इस जीत ने बायबर्स को “इस्लाम का रक्षक” की उपाधि दिलाई और उन्हें सुल्तान बनने का मार्ग प्रशस्त किया।

रोचक कहानी 5: मंगोलों का घमंड
युद्ध से पहले, मंगोल सेनापति कितबुका ने बायबर्स को एक पत्र भेजा, जिसमें लिखा था, “हमारी सेना सूरज की तरह है, जिसे कोई नहीं रोक सकता।” बायबर्स ने जवाब में कहा, “सूरज को भी ढलना पड़ता है।” उनकी यह चतुर प्रतिक्रिया मंगोलों के मनोबल को तोड़ने में कारगर रही।


बायबर्स की अन्य उपलब्धियां

ऐन जालूत की लड़ाई के बाद, बायबर्स ने ममलूक साम्राज्य को और मजबूत किया। उन्होंने क्रूसेडरों के खिलाफ कई अभियान चलाए और उनके कई किलों, जैसे एंटिओक, जफ्फा और अक्का, पर कब्जा किया। उनकी रणनीतियां और तेजी ने यूरोपीय सेनाओं को हैरान कर दिया।

क्रूसेडरों के खिलाफ युद्ध

बायबर्स ने क्रूसेडरों को हराने के लिए कई चतुर रणनीतियों का उपयोग किया। एक बार उन्होंने रात के समय एक किले पर हमला किया, जब क्रूसेडर पूरी तरह तैयार नहीं थे। उनकी सेना ने किले की दीवारों को तोड़ दिया और कुछ ही घंटों में कब्जा कर लिया।

रोचक कहानी 6: किले की घेराबंदी
बायबर्स ने एक क्रूसेडर किले को घेरने के लिए स्थानीय लोगों को अपने साथ मिलाया। उन्होंने स्थानीय लोगों को किले में भोजन और पानी की आपूर्ति करने के बहाने भेजा। रात के समय, बायबर्स की सेना ने किले पर हमला कर दिया और आसानी से कब्जा कर लिया। यह उनकी रणनीतिक चतुराई का एक और उदाहरण है।

प्रशासनिक सुधार

बायबर्स केवल एक योद्धा ही नहीं, बल्कि एक कुशल शासक भी थे। उन्होंने डाक प्रणाली को मजबूत किया, जिससे संचार तेज हुआ। उन्होंने मस्जिदों, स्कूलों और अस्पतालों का निर्माण करवाया, जिससे ममलूक साम्राज्य में समृद्धि आई। उनकी सादगी और नम्रता ने उन्हें लोगों का प्रिय बनाया।

रोचक कहानी 7: सुल्तान की सादगी
एक बार बायबर्स एक साधारण सैनिक के वेश में बाजार गए। वहां उन्होंने एक गरीब व्यापारी की मदद की, जिसका माल चोरों ने लूट लिया था। जब व्यापारी को पता चला कि वह सुल्तान बायबर्स थे, तो वह उनकी उदारता से अभिभूत हो गया।

सच्चा शासक वह है, जो अपने लोगों के दुख-दर्द को समझे। – सुल्तान बायबर्स


बायबर्स की रणनीति: एक विश्लेषण

बायबर्स की रणनीतियां आज भी सैन्य स्कूलों में पढ़ाई जाती हैं। उनकी कुछ प्रमुख रणनीतियां थीं:

  1. मंगोलों की रणनीति का उपयोग: बायबर्स ने मंगोलों की “नकली पीछे हटने” की रणनीति को उनके खिलाफ ही इस्तेमाल किया।
  2. भू-भाग का लाभ: पहाड़ी और जंगली क्षेत्र का चयन मंगोल घुड़सवारों की गति को रोकने में सहायक रहा।
  3. जासूसी और सूचना: बायबर्स के जासूसों ने मंगोलों की हर गतिविधि की सटीक जानकारी दी, जिससे उनकी योजना कामयाब हुई।
  4. आश्चर्यजनक हमले: बायबर्स रात के समय या अप्रत्याशित मौकों पर हमला करते थे, जिससे दुश्मन तैयार नहीं हो पाता था।

दुश्मन की ताकत को उसकी कमजोरी में बदल दो। – सुल्तान बायबर्स


ऐन जालूत की विरासत

ऐन जालूत की लड़ाई ने मंगोलों की प्रगति को रोका और ममलूक साम्राज्य को एक वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया। बायबर्स ने इस जीत के बाद क्रूसेडरों के खिलाफ कई अभियान चलाए, जिससे ममलूक साम्राज्य का विस्तार हुआ। उनकी रणनीतियां और नेतृत्व आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं।

रोचक कहानी 8: सैनिकों का विश्वास
युद्ध के बाद, बायबर्स ने अपने सैनिकों के साथ एक साधारण भोज में हिस्सा लिया। एक सैनिक ने उनसे पूछा, “महान सुल्तान, आपको मंगोलों से डर नहीं लगा?” बायबर्स ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “डर तो था, लेकिन मेरे सैनिकों पर विश्वास उससे बड़ा था।” यह जवाब सैनिकों के बीच आज भी लोकप्रिय है।


बायबर्स का व्यक्तित्व और जीवन के अंतिम वर्ष

बायबर्स न केवल एक योद्धा, बल्कि एक दयालु और नम्र शासक भी थे। उन्होंने अपने सैनिकों के साथ साधारण भोजन किया और उनकी समस्याओं को सुना। उनकी मृत्यु 1277 में दमिश्क में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई, संभवतः जहर देने के कारण। उनकी मृत्यु ने ममलूक साम्राज्य में शोक की लहर दौड़ा दी, लेकिन उनकी विरासत आज भी जीवित है।

रोचक कहानी 9: बायबर्स की अंतिम यात्रा
अपने अंतिम दिनों में, बायबर्स ने अपने सैनिकों को एकत्र किया और कहा, “मेरी तलवार अब शांत हो सकती है, लेकिन आपका साहस हमेशा जीवित रहेगा।” उनकी यह बात उनके सैनिकों के लिए प्रेरणा बनी।


FAQs

  1. ऐन जालूत की लड़ाई कब और कहां हुई?
    यह युद्ध 3 सितंबर 1260 को फिलिस्तीन के ऐन जालूत (गोलियथ का झरना) में हुआ।
  2. सुल्तान बायबर्स की इस युद्ध में क्या भूमिका थी?
    बायबर्स ममलूक सेना के प्रमुख कमांडर थे और उन्होंने अपनी रणनीति से मंगोलों को हराया।
  3. मंगोलों की हार क्यों हुई?
    मंगोलों की हार का कारण बायबर्स की चतुर रणनीति, जासूसी, और भू-भाग का सही उपयोग था।
  4. ऐन जालूत की लड़ाई का क्या महत्व था?
    इसने मंगोल आक्रमण को रोका और ममलूक साम्राज्य को एक शक्तिशाली ताकत के रूप में स्थापित किया।
  5. बायबर्स की रणनीतियां आज कैसे प्रासंगिक हैं?
    उनकी जासूसी, भू-भाग के उपयोग, और मनोबल बढ़ाने की रणनीतियां आधुनिक सैन्य रणनीतियों के लिए प्रेरणा हैं।
  6. बायबर्स की मृत्यु कैसे हुई?
    उनकी मृत्यु 1277 में दमिश्क में संदिग्ध परिस्थितियों में, संभवतः जहर देने के कारण हुई।

सुल्तान बायबर्स और ऐन जालूत की लड़ाई की यह रोमांचक कहानी अपने परिवार और दोस्तों के साथ शेयर करें, ताकि वे भी इस शूरवीर योद्धा की गाथा से प्रेरणा लें। क्या आपको बायबर्स की कोई रणनीति या कहानी सबसे ज्यादा पसंद आई? नीचे कमेंट करके हमें बताएं! अगर आपको यह लेख मूल्यवान लगा, तो हमारी सामग्री को और बेहतर बनाने के लिए डोनेशन पर विचार करें। आपका समर्थन हमें और ऐसी प्रेरक कहानियां लाने में मदद करेगा!

टैग :इतिहास
शेयर करें :
Facebook Pinterest Whatsapp Whatsapp
◈  इस पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया दें :
Proud1
Happy0
Love0
Surprise0
Sad0
Angry0
एо अहमद
लेखकएо अहमद
Founder and Editor
Follow:
मैं आफताब अहमद इस साइट पर एक लेखक हूं, मुझे विभिन्न शैलियों और विषयों पर लिखना पसंद है। मुझे ऐसा निबंध और ब्लॉग लिखना अच्छा लगता है जो मेरे पाठकों को चिंतन और प्रेरणा देती हैं।
कमेंट करें! कमेंट करें!

कमेंट करें! Cancel reply

You must be logged in to post a comment.

हमें फॉलो करें >>

FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe

सबसे अधिक पढ़ी गईं >>

🌟 इमाम अहमद इब्न हंबल: एक बहादुर योद्धा की कहानी जिसने इल्म और ईमान की मिसाल कायम की

20 मिनट में पढ़ें
289 लोगों ने देखा

डॉ. ज़ाकिर हुसैन: भारत के पहले मुस्लिम राष्ट्रपति की प्रेरणादायक कहानी

12 मिनट में पढ़ें
269 लोगों ने देखा

नासिर अहमद: वह शख्स जिसने आपकी डिजिटल दुनिया बदल दी!

10 मिनट में पढ़ें
82 लोगों ने देखा
8 Islamic Principles for Successful Business, in the Light of the Holy Quran and Hadith

सफल व्यापार के लिए 8 इस्लामी सिद्धांत, पवित्र कुरान और हदीस की रोशनी में

9 मिनट में पढ़ें
641 लोगों ने देखा

अहमद कथराडा: दक्षिण अफ्रीका के रंगभेद विरोधी आंदोलन के भारतीय मूल के नायक

14 मिनट में पढ़ें
29 लोगों ने देखा

मौलाना शाह अब्दुल कादिर लुधियानवी: 1857 की जंग-ए-आजादी के गुमनाम नायक

12 मिनट में पढ़ें
289 लोगों ने देखा

इमाम अल-बुखारी: इस्लामिक विद्वान और हदीस संकलनकर्ता

29 मिनट में पढ़ें
98 लोगों ने देखा

अल-इद्रीसी: मध्यकालीन विश्व का महान भूगोलवेत्ता और उनकी रोमांचक कहानियां

12 मिनट में पढ़ें
175 लोगों ने देखा

मौलाना अबुल आला मौदुदी: किताबों की ताकत से इस्लाम की सच्चाई को दुनिया तक पहुंचाने वाला शख्स

12 मिनट में पढ़ें
362 लोगों ने देखा

इमाम मुस्लिम: सहीह मुस्लिम के संकलनकर्ता

14 मिनट में पढ़ें
258 लोगों ने देखा
Avatar
Daily Hadith
Today at 12:00 PM

सम्बंधित टॉपिक >>

बॉलीवुड एक्टर शाहरूख खान के नाना शाहनवाज खान जिन्होंने लाल किले से ब्रिटिश झंडा उतारकर फेका और तिरंगा फहराया।

5 मिनट में पढ़ें
15 लोगों ने देखा

औरंगज़ेब की ज़िंदगी के आख़िरी 27 साल: क़रीबियों की मौत, वारिस का संकट और क़िलों की जंग

13 मिनट में पढ़ें
10 लोगों ने देखा
last-mugal-emperor-and-freedom-fighter-bahadur-shah-jafar

1857 क्रांति के महानायक अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह ज़फर

4 मिनट में पढ़ें
127 लोगों ने देखा

1857 स्वतंत्रता संग्राम के एक गुमनाम नायक – शहीद शेख भिखारी

5 मिनट में पढ़ें
310 लोगों ने देखा

महत्वपूर्ण लिंक्स

  • सहेजी गई पोस्ट
  • आपके लिए
  • पढ़े गए पोस्ट
  • पसंदीदा टॉपिक्स
  • मेरी प्रोफाइल
  • हमारे बारे में
  • हमारी सहायता करें
  • हमे विज्ञापन दें
  • भविष्य योजना
  • साइट के लेखक
  • संपर्क करें
  • गोपनीयता नीति
  • अस्वीकरण
  • सेवा की शर्तें
  • सुधार नीति

All content © NoorPost


News Video
Quiz
Tools
More

Quiz Categories

General Knowledge Test IQ Islamic Quiz Science History Fun Quiz

Tools & Utilities

Age Calc Converter QR Gen BMI Calc Search Love Calc Wishes

Explore More

About Us Donate Us Privacy Terms Contact Advertise Correction Disclaimer Future Plan Writers
adbanner
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

क्या पासवर्ड भूल गए?

Not a member? Sign Up