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> स्टोरी > आखिर खुल गया राज कि आखिर इज़राइल ने ईरान के 30 वरिष्ठ सुरक्षा प्रमुखों और 11 वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिकों को कैसे मार गिराया।

आखिर खुल गया राज कि आखिर इज़राइल ने ईरान के 30 वरिष्ठ सुरक्षा प्रमुखों और 11 वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिकों को कैसे मार गिराया।

मजहब बदला, बिस्तर तक पहुंची, और फिर… मोसाद की ‘हसीना’ ने तेहरान में मचाई तबाही!
जुबेर खान 'अकेला'
जुबेर खान 'अकेला'
Published: 06/07/2025
137 लोगों ने देखा
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9 मिनट में पढ़ें

यह कहानी एक ऐसी महिला की है, जिसने अपनी पहचान, धर्म, और सुंदरता को हथियार बनाकर दुनिया की सबसे शक्तिशाली खुफिया एजेंसी, मोसाद, के लिए ईरान के गहरे राज़ उजागर किए। यह है कैथरीन पेरेज़ शेकेड की कहानी, एक जासूस, जो पत्रकारिता की आड़ में ईरान के सत्ता के गलियारों से लेकर बेडरूम तक पहुंच गई, और जिसने अपनी चतुराई से न सिर्फ ईरान को हिलाकर रख दिया, बल्कि विश्वास और धर्म जैसे संवेदनशील मुद्दों को भी एक बड़े खेल का हिस्सा बना दिया।

हाईलाइट्स
  • कैथरीन की शुरुआत: एक यहूदी लड़की से शिया मुस्लिम तक
  • ईरान में घुसपैठ: पत्रकारिता की आड़ में जासूसी
  • ‘मुता’ का जाल: बेडरूम से खुफिया जानकारी तक
  • सुप्रीम लीडर से मुलाकात: मिशन का चरम
  • पर्दाफाश: ईरान में भूकंप
  • मिशन का विनाशकारी असर
  • ईरान का जवाबी हमला और कैथरीन का रहस्य
  • एक अनुत्तरित सवाल

कैथरीन की शुरुआत: एक यहूदी लड़की से शिया मुस्लिम तक

कैथरीन प्रिंस शदाबी, जिसे बाद में कैथरीन पेरेज़ शेकेड के नाम से जाना गया, एक यहूदी परिवार में पैदा हुई थी। उसके दादा-नाना होलोकॉस्ट में नाज़ियों के खिलाफ लड़े थे, और यहूदी परंपराओं में उसका पालन-पोषण हुआ। लेकिन कैथरीन की जिंदगी ने एक अनपेक्षित मोड़ लिया जब उसने साइकोलॉजी में डिग्री, फिर फाइनेंस और कम्युनिकेशन में डबल मास्टर्स हासिल किया। उसकी बुद्धिमता और तेज़ दिमाग ने उसे एक असाधारण व्यक्तित्व बनाया।

2004 में, कैथरीन की मुलाकात एक यमनी मुस्लिम से हुई, जिससे उसने शादी की और इस्लाम कबूल कर लिया। यह एक सामान्य प्रेम कहानी लग रही थी, लेकिन 2014 में उसने अपने पति को तलाक दे दिया, सुन्नी इस्लाम छोड़कर शिया इस्लाम अपनाया, और ईरान के लिए रवाना हो गई। यहीं से उसकी असली कहानी शुरू होती है—एक ऐसी कहानी, जो मोसाद के सबसे खतरनाक मिशनों में से एक बन गई।

ईरान में घुसपैठ: पत्रकारिता की आड़ में जासूसी

ईरान में, कैथरीन ने एक पत्रकार के रूप में अपनी पहचान बनाई। उसने ईरान की इस्लामी क्रांति के समर्थन में लेख लिखे, जो इतने प्रभावशाली थे कि 2015 से 2017 तक वह ईरान की सबसे चर्चित पत्रकार बन गई। उसकी लेखनी ने लोगों के दिलों में क्रांति की आग जलाई, और उसकी विश्वसनीयता इतनी बढ़ गई कि वह सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामनाई की वेबसाइट पर भी लिखने लगी। उसने दो किताबें लिखीं—“अरेबियाज़ राइज़िंग अंडर द बैनर ऑफ़ द फर्स्ट इमाम” और “फ्रॉम मक्का टू द प्लेन ऑफ़ कर्बला: वॉकिंग विद द होली हाउसहोल्ड ऑफ़ द प्रॉफेट”, जो उसकी शिया इस्लाम के प्रति निष्ठा का प्रमाण बनीं।

लेकिन यह सब एक सुनियोजित ढोंग था। कैथरीन मोसाद की एक प्रशिक्षित जासूस थी, जिसका मिशन था ईरान के परमाणु कार्यक्रम, उसके वैज्ञानिकों, और हमास व हिज़बुल्लाह जैसे संगठनों के नेताओं के बारे में खुफिया जानकारी जुटाना। उसने अपनी सुंदरता, बुद्धिमता, और धार्मिक छवि को हथियार बनाया, और ईरान की सत्ता सुरक्षा व्यवस्था तक पहुंची।

‘मुता’ का जाल: बेडरूम से खुफिया जानकारी तक

कैथरीन ने ईरान के शीर्ष अधिकारियों, व्यापारियों, प्रोफेसरों, पासदाराने इंकलाब के कमांडरों, और मंत्रियों तक अपनी पहुंच बनाने के लिए शिया इस्लाम में प्रचलित ‘मुता’ (अस्थायी विवाह) का सहारा लिया। उसने कथित तौर पर 100 से अधिक पुरुषों के साथ इस तरह के रिश्ते बनाए। इन रिश्तों के जरिए वह ईरान के संवेदनशील ठिकानों, जैसे परमाणु सुविधाओं, सैन्य अड्डों, और सुप्रीम लीडर के काफिले की जानकारी तक पहुंच गई।

उसके पास ऐसी जानकारियां थीं, जो सैटेलाइट्स से नहीं मिल सकती थीं—जैसे कि खामनाई का काफिला कब और कहां जाएगा, किस दफ्तर में कौन सी फाइल है, और ड्रोन हमलों के लिए संभावित टारगेट। यह सब जानकारी वह मोसाद को भेज रही थी, और किसी को भनक तक नहीं लगी कि यह ‘क्रांतिकारी’ और ‘अकीदतमंद’ महिला एक इज़राइली जासूस है।

सुप्रीम लीडर से मुलाकात: मिशन का चरम

कैथरीन का सबसे साहसिक कदम था सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामनाई से मुलाकात। फरवरी 2017 में, उसकी किताब “रेवोल्यूशन ऑफ़ ईरान” की वजह से खामनाई ने उसे मिलने के लिए बुलाया। यह मुलाकात बेहद जोखिम भरी थी, क्योंकि कैथरीन का भेद किसी भी क्षण खुल सकता था। लेकिन उसने अपनी चतुराई और आत्मविश्वास से इस असंभव मिशन को भी पूरा कर लिया। इस मुलाकात के बाद वह ईरान में हीरोइन बन गई। अखबारों में उसका नाम छपने लगा, टीवी पर इंटरव्यू होने लगे, और धार्मिक हलकों में उसकी चर्चा होने लगी।

2017 से 2022 तक, पांच साल तक कैथरीन ने ईरान के हर खुफिया ठिकाने में अपनी पैठ बनाए रखी। उसकी आंखों से मोसाद को पूरा ईरान दिखाई दे रहा था। वह राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी और अन्य बड़े नेताओं के साथ तस्वीरों में मुस्कुराती नजर आती थी, और कोई नहीं जानता था कि वह एक जासूस है।

पर्दाफाश: ईरान में भूकंप

2022 में, कैथरीन अचानक ईरान से गायब हो गई। उसी साल, टाइम्स ऑफ़ इज़राइल में उसका एक लेख छपा, जिसमें उसने खुलासा किया, “मैंने ईरान को अंदर से देखा और अब मैं वापस आ चुकी हूं। मैंने इस्लाम सिर्फ घुसपैठ के लिए कबूल किया और विलायत सिर्फ रसाई के लिए।” इस खुलासे ने ईरान में तहलका मचा दिया। धार्मिक संस्थान हिल गए, उसके इंटरव्यू हटा दिए गए, और जिन लोगों ने उसके साथ रिश्ते बनाए थे, वे सदमे में थे। ईरान की खुफिया एजेंसी ने देशभर में उसके पोस्टर और फोटो बांटे, लेकिन कैथरीन का कोई सुराग नहीं मिला।

मिशन का विनाशकारी असर

कैथरीन के मिशन का असर धीरे-धीरे सामने आने लगा। 31 जुलाई 2024 को, तेहरान में एक सुरक्षित इमारत पर ड्रोन हमला हुआ, जिसमें हमास के सरबराह इस्माइल हानिया शहीद हो गए। दो महीने बाद, 27 सितंबर 2024 को, बेरूत के दक्षिणी इलाके में हिज़बुल्लाह के सरबराह हसन नसरुल्लाह भी मारे गए। इन हमलों में एक बात समान थी—टारगेट की लोकेशन 100% सटीक थी, जो केवल किसी अंदरूनी सूत्र से ही मिल सकती थी।

13 जून 2025 को, इज़राइल ने ईरान के 30 वरिष्ठ सुरक्षा प्रमुखों और 11 परमाणु वैज्ञानिकों को मार गिराया। कुल 900 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया गया, और हर हमले में सटीक नक्शे और रियल-टाइम जानकारी का इस्तेमाल हुआ। यह सब कैथरीन के जासूसी नेटवर्क का नतीजा था। उसने न सिर्फ जानकारी जुटाई, बल्कि अपने पीछे ऐसे लोग छोड़ गए, जो उसके लगाए विचारों और निशानों को सक्रिय करते रहे।

ईरान का जवाबी हमला और कैथरीन का रहस्य

इन हमलों के बावजूद, ईरान ने हार नहीं मानी। उसने इज़राइल पर ऐसा जवाबी हमला किया कि वह घुटनों पर आ गया। लेकिन सवाल यह है कि क्या ईरान अब अपने अंदर मोसाद और रॉ (RAW) जैसे जासूसी नेटवर्क का सफाया कर पाएगा?

आज कैथरीन कहां है, यह कोई नहीं जानता। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह किसी नई पहचान के साथ किसी दूसरे देश में हो सकती है। अपने इंटरव्यू में वह दावा करती है कि वह मोसाद की जासूस नहीं, बल्कि एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट थी, जिसने ईरान को समझने के लिए इस्लाम कबूल किया। लेकिन मोसाद को उसने जो जानकारी दी, वह किसी जासूस से कम नहीं थी। वह कहती है, “मैंने सिर्फ सच जानने की कोशिश की,” लेकिन सवाल यह है कि क्या वह सचमुच सिर्फ एक पत्रकार थी, या फिर मोसाद की सबसे खतरनाक ‘हसीना’?

एक अनुत्तरित सवाल

कैथरीन की कहानी हमें सोचने पर मजबूर करती है—क्या एक व्यक्ति अपनी पहचान, धर्म, और विश्वास को इतनी आसानी से बदल सकता है? क्या युद्ध और खुफियागिरी की दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं? कैथरीन पेरेज़ शेकेड की कहानी न सिर्फ एक जासूसी थ्रिलर है, बल्कि यह विश्वास, धोखे, और सत्ता के खेल की एक गहरी पड़ताल भी है।


क्या आप मानते हैं कि कैथरीन सिर्फ एक पत्रकार थी, या वह मोसाद की सबसे चालाक जासूस थी? अपनी राय कमेंट में बताएं!

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जुबेर खान 'अकेला'
लेखकजुबेर खान 'अकेला'
Content Writer and Graphic Designer
मैं जुबेर खान, एक लेखक हूँ। कहानियाँ, कविताएँ और निबंध - मुझे हर शैली में अपने विचारों और भावनाओं को शब्दों में पिरोना पसंद है। मेरा लक्ष्य है अपने लेखन से पाठकों का मनोरंजन करना और उन्हें प्रेरित करना। आप मेरे लेख noorpost.com पर पढ़ सकते हैं, जहाँ मैं भारत और दुनिया की ताज़ा ख़बरों और विश्लेषण पर लिखता हूँ। आपके सुझावों का हमेशा स्वागत है!
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